खनिज अर्थशास्त्र प्रभाग
भारतीय खान ब्यूरो के अन्तर्गत खनिज अर्थशास्त्र प्रभाग की स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी। वर्ष 1956 में इसे विभाग के अन्तर्गत प्रभाग का दर्जा प्राप्त हुआ। खनिज अर्थशास्त्र प्रभाग सरकार एवं खनिज उद्योग को विपणन, खनिजों के विशिष्टीकरण तथा उपयोग, खनिज विधान, खनिज संसाधनों की सूची, खनन पट्टे तथा कराधान आदि विषयों पर विशेष रूप से सूचना, सहायता तथा परामर्शी सेवाएं प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त यह अपने सांविधिक एवं गैर सांविधिक स्रोतों से प्राप्त खनिज उद्योग पर अद्यतन सूचनाओं का अपने प्रमुख प्रकाशन ’’भारतीय खनिज वर्ष पुस्तक ’’ तथा अन्य अनेक प्रकाश नों के द्वारा प्रचार-प्रसार करता है। इस प्रभाग का प्रमुख मुख्य खनिज अर्थशास्त्री होता है। भारतीय खान ब्यूरो के सेंट्रल लाइब्रेरी एंड पब्लिकेशन सेक्शन भी इसी प्रभाग के अन्तर्गत कार्य करती है। विभाग के प्राथमिक उद्देश्यों को ध्यान में रखने के साथ ही खनिज अर्थशास्त्र प्रभाग खान खनिजों एवं सहायक विषयों पर विभिन्न प्रकार के आंकड़ों का एकत्रीकरण संधारण, तथा अपने विभिन्न क्रिया-कलापों द्वारा इनका प्रचार-प्रसार करके अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करता है। खनिज अर्थशास्त्र प्रभाग के यूनिट वार मुख्य कार्य निम्नानुसार हैं:
राष्ट्रीय खनिज सूची (एन.एम.आई.)
खनिज अर्थशास्त्र प्रभाग की राष्ट्रीय खनिज सूची इकाई का प्रमुख कार्य देश में पट्टा क्षेत्र तथा पट्टा मुक्त क्षेत्र में समावेशित खनिज भंडारों की राष्ट्रीय खनिज सूची को तैयार करना तथा इसका प्रति पंचवर्षीय आधार पर अद्यतीकरण करना है। इससे खनिज भण्डारों के समग्र भू-वैज्ञानिक तथा तकनीकी आर्थिक स्थिति के परिदृश्य का ज्ञान प्राप्त होता है जो कि खनिज विकास की योजना तथा कार्यक्रम निर्माण हेतु आवश्यक है।
राष्ट्रीय खनिज सूची का तैयार किया जाना एक सतत प्रक्रिया है जो कि कुछ खनिजों के साथ वर्ष 1968 में प्रारम्भ की गई थी। बाद के संस्करणों में इसमें अन्य खनिज भी शामिल किये गए। अन्तिम राष्ट्रीय खनिज सूची 01.4.2015 को अद्यतन की गई जिसमें 71 खनिजों पर आंकड़ों को समावेशित किया गया। राष्ट्रीय खनिज सूची पूर्णरूप से कम्प्युटरीकृत है तथा फ्रीहोल्ड डिपॉजिट के लिए आवश्यक सूचना, हितधारकों को प्रभार आधार पर उपलब्ध है।
राष्ट्रीय खनिज सूची के वर्तमान स्वरूप में सूचना के प्रारम्भिक स्रोतों के साथ-साथ निम्नलिखित पक्षों का समावेश है- खनिज भंडारों की /पटटा क्षेत्रों की अवस्थिति, भूमि का प्रकार, अवसंरचना, भूविज्ञान, गवेश ण, भौतिक और रासायनिक गुणधर्म, सज्जीकरण, संसाधन, भण्डार, पट्टा मुक्त/पट्टा क्षेत्र आदि।
नीति निर्माताओं तथा उद्यमियों की आवश्कताओं को ध्यान में रखते हुए संसाधनों का अनुमान गवेषण तथा तकनीकी-आर्थिक आधारों के साथ-साथ उनके अन्त्यं उपयोग के अनुसार मात्रा का वर्गीकरण भी दिया गया था। राष्ट्रीय खनिज सूची सरकार तथा निजी अभिकरणों द्वारा किए गए गवेषण , विकास तथा खनन संक्रियाओं का विस्तृत परिदृश्य उपलब्ध कराती है। इस प्रकार राष्ट्रीय ,खनिज सूची उद्यमियों को अपने लक्ष्य भंडारों के प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होती है।
दी यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क क्लासिफिकेशन (यूएनफएसी) संसाधन अनुमानों के रिपोर्ट करने की एक अन्तर्राष्ट्रीय प्रणाली है जो कि तीन बिन्दुओं भूवैज्ञानिक, सम्भाव्यता, तथा आर्थिक साध्यता पर आधारित है, को राष्ट्रीय खनिज सूची में 01.4.2000 से सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है। जिससे निवेश कों को राष्ट्रीय खनिज सूची में उपलब्ध सूचनाओं तक पहुंच आसान हो गई है तथा वे इन सूचनाओं का विश्व स्तर या स्वीकार्य मानकों के आधार पर आंकलन कर सकते हैं। राष्ट्रीय खनिज सूची द्वारा सृजित आंकडों का प्रचार-प्रसार भारतीय खान ब्यूरो के विभिन्न प्रकाश नों द्वारा किया जाता है तथा इनका प्रयोग सरकार तथा उद्योग द्वारा किया जा रहा है।
भारतीय खनिज वर्ष पुस्तक (आई एम वाई बी)
यह योजना खानों, खनिजों, धातुओं, खनिज वस्तु व्यापार और खनिज आधारित उद्योगों से संबंधित सूचना के आधार और प्रसार को बढ़ाने के उद्देश्य से जुड़ी है जो हमारे औद्योगिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण खंड है। "भारतीय खनिज वर्ष पुस्तक" (IMYB) में भारत के खनिजों और खनिज आधारित उद्योगों के संपूर्ण "सरगम" को दर्शाया गया है। IMYB सामान्य रूप से खनिज वार भंडार / संसाधन, उत्पादन, खपत, उद्योग वार विवरण, विदेश व्यापार नीति, आयात-निर्यात विवरण और भविष्य के दृष्टिकोण के बारे में विवरण शामिल करता है। खनिज आधारित उद्योग की जानकारी में संयंत्र, क्षमता, उत्पादन, अंतिम उपयोग खनिज खपत (स्वदेशी या आयातित), आपूर्ति के स्रोत, मूल्य, विस्तार कार्यक्रम, यदि कोई हो, आदि का स्थान शामिल है, तो IMYB की तैयारी में डेटा / जानकारी प्राप्त करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और उपक्रम कंपनियों, आर एंड डी इंस्टीट्यूशंस, पोर्ट अथॉरिटीज, मिनरल प्रोड्यूसर्स, यूजर्स, ट्रेडर्स आदि सहित खनिज उद्योगों में लगे विभिन्न हितधारकों से गैर-वैधानिक आधार और एसीडीआरसी, 2017 के तहत प्रस्तुत किए गए वार्षिक रिटर्न से जानकारी को प्राप्त करना पत्राचार शामिल है। । प्राप्त आंकड़ों को संश्लेषित, विश्लेषण और विभिन्न समीक्षाओं में शामिल किया जाता । IMYB में भाग I सामान्य समीक्षा से संबंधित है, भाग II धातु और मिश्र से संबंधित है और भाग III खनिज समीक्षा से संबंधित है। इस प्रकाशन की व्यापक पाठक-राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों हैं।
बुलेटिन आफ मिनरल इंफोरमैशन (बी एम आई )
दी बुलेटिन इंफोरमेशन खनिज सूचना का अर्द्धवार्षिक बुलेटिन है। इसमें खनिज (परमाणु और हाइड्रो कार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 के नियम 59(1) के अन्तर्गत विभिन्न विवरणियों तथा खनन पट्टा (एमएल) / पूर्वेक्षण अनुज्ञप्तियों (पीएल), (पीएल) सह (एमएल) निष्पादन विलेख, सार, नवीनीकरण, संशोधन, प्रतिसंहरण, समर्पण,खनन आदि से प्राप्त सूचनाओं का समावेश होता है। जो कि सम्बंधित राज्य सरकारों के खान एवं भूविज्ञान निदेशालय द्वारा प्रस्तुत की जाती है। इसके अतिरिक्त खान मालिक एमसीडीआर 2017 के नियम 20, 21, 28, 29, 50 तथा 51 के अन्तर्गत निर्धारित प्रपत्र में नोटिस (सूचना)/विवरणियां प्रेषित करते है। लेकिन पूर्वेक्षण क्षेत्र (पीएल) / (पीएल) सह (एमएल), पट्टा क्षेत्र के संबंध में अनुमोदन/वर्तमान पट्टा क्षेत्र में अतिरिक्त खनिज क्षेत्र को सम्मिलित किए जाने संबंधी आदेश केन्द्र सरकार से प्राप्त होते है। इस प्रकार प्राप्त आंकडे़ का संधारण किया जाता है तथा बुलेटिन आफ मिनरल इंर्फोमेशन के छमाही संस्करण में तीन श्रेणियों के अन्तर्गत समावेशित किया जाता है।
- खनन, पूर्वेक्षण अनुज्ञप्तियों (पीएल) और (पीएल) सह (एमएल) अनुज्ञप्तियों की प्रकृति (ट्रेन्ड) पर तालिका
- खनिज आधारित उत्पादों के उत्पादन पर सूचना।
- देश और विदेश में खनिज और खनन गतिविधियों पर बल देना।
विश्व खनिज आसूचना (डब्ल्यू. एम. आई.)
इस कार्य के माध्यम से, खनिज अर्थशास्त्र प्रभाग विभिन्न देशों के खनिज भंडारों और उत्पादन आंकड़ों पर अद्यतन जानकारी को संसाधित करता है और बनाए रखता है। यह जानकारी भारत सरकार को द्विपक्षीय सहयोग संधि तथा वैष्विक आर्थिक उदारीकरण परिदृष्य के अन्तर्गत विभिन्न देशों के साथ करार करने में सहायता हेतु अनिवार्य है।
प्रौद्योगिकी नवाचार, नई भंडारों की खोज, इसकी क्षमता, खनिजों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और खनिजों और धातुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भारत के आयात या निर्यात व्यापार और दुनिया के अन्य देशों के खनिज क्षेत्र में हितों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए, आत्मनिर्भरता की दिशा में भारतीय खनिज संसाधनों के समुचित उपयोग और दीर्घकालिक योजना के लिए खनिज क्षेत्र में विश्वव्यापी विकास पर निरंतर नजर रखने की आवश्यकता है।
वर्तमान में देश-वार खनिज भंडार और उत्पादन की जानकारी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों और 60 विभिन्न खनिजों के लिए अन्य स्रोतों से संकलित किए जाते हैं।
खनिज सूचना और परामर्शदात्री सेवाएं
यह ईकाई सरकारी अभिकरणों/व्यक्तियों को खनिज से संबंधित सूचनाएं प्रदान करती है तथा सरकार को विभिन्न खनिजों से संबंधित मुद्दों पर परामर्श तथा समस्याओं तथा नीतिगत मुद्दों का परीक्षण करके सरकार को समय-समय पर अपनी समीक्षा प्रस्तुत करती है।
एमआईएएस यूनिट आवश्यकतानुसार मंत्रालय संदर्भ, संसदीय प्रश्नों हेतु तथा केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारों, लोक अभिकरण तथा निजी अभिकरणों को(सहायता देने हेतु खनिज संसाधनों, उत्पादन प्रकृति, विभिन्न उद्योगों में खनिजों के उपयोग, विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में खनिज/धातुओं का मूल्य खनिजों/धातुओं का निर्यात आयात तथा विभिन्न अभिकरणों द्वारा की गई गवेश णा गतिविधियों पर सूचना उपलब्ध कराता है।
एमआईएएस इकाई माननीय मंत्री/राज्यमंत्री, खान मंत्रालय तथा विभागाध्यक्ष द्वारा आवश्यकतानुसार चाहे गए ’की नोट एड्रेस’’/मसौदा भाषण/तकनीकी पेपर/प्रस्तुतीकरण आदि भी तैयार करता है।
खनिज विधायन
यह इकाई सरकारी / निजी एजेंसियों को खनन एवं खनिज नियमों की जानकारी प्रदान करती है तथा सरकार को एमएमडीआर एकट व इसके अधीन नियमों से संबंधित सलाह प्रदान करती है । यह गौण खनिजों रियात नियम (एमएमसीआर), खनिज नीति तथा अन्य मंत्रालयों जैसे इस्पात, श्रम, वाणिज्य व उद्योग, रोजगार, विदेश व्यापार नीतत आदि की नीतियों के संबंध में सरकार को सलाह देती है तथा कठिनाइयों व नीति मामलों की जांच कर समय-समय पर सरकार को तत्संबंधी सलाह देती है ।
विधायन इकाई खान मंत्रालय व अन्य मंत्रालयों द्वारा गठित विभिन्न समितियों जैसे बैठकें, कार्यशालाएं तथा रॉयल्टी दरों व डेड रेंटकी समीक्षा हेतु गठित स्टडी ग्रुप (कोयला, लिग्नाइट व सैंड जैसे मुख्य खनिजों के अलावा), राष्ट्रीय खनिज नीति, 1993 की पुनरीक्षा हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति, एमएमडीआर एक्ट, एमसीआर तथा एमसीडीआर में मसौदा संशोधन हेतु सुझाव देने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप, ग्रेनाइट डेवलपमेंट काउंसिल बैठक तथा मार्बल डेवलपमेंट ग्रुप आदि में सक्रिय रूप से भाग लेतील है । यह इकाई उपबंधों की व्याख्या / तकनीकी व्याख्या/ भारतीय खनन एक्ट नियम व विनियम, रेंट, रॉयल्टी, खनिज राइट, कर, लौह अयस्क, क्रोमाइट व मैंगनीज अयस्क हेतु निर्यात की सीमा, निर्यात डयूटी, न्यूनतम मजदूरी एवं खनन क्षेत्र में रोजगार के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ तथा खनिज उपभोक्ता पर व्यापार नीति पर निर्णय लेने के लिए आंकड़े उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । यह समय-समय पर विभिन्न खनिज विषयक मामलों पर सरकार के त्वरित, मजबूत एवं न्यायोचित निर्णय लेने के लिए संवेदनशील प्रक्रिया है ।
खनिज सूचना बुलेटिन (बीएमआई) के अनुच्छेद (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय / उच्च न्यायालयों में दायर मुकदमों व भारतीय खनिज विधायन, नियमों से संबंधित निर्णयों तथा व्यापार नीति में बदलावों, उत्पाद शुल्क आदि के सारांश समेकित हैं । ये राजपत्र व व्यापार पत्रिका आदि से लिए गए हैं तथा इन्हें खनिज सूचना की अर्ध वार्षिक बुलेटिन में प्रकाशित किया जाता है । इस प्रसार से खनिज उद्योग को विभिनन निर्णयों जैसे वर्तमान खनिज विधायन आदि को समझने और उन्हें लागू करने में सहायता मिलती है । इस इकाई का मुख्य एक्ट / नियम व उपनियम में संशोधन करने की प्रक्रिया में तथा तत्संबंधी सुझाव देने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान है ।
राष्ट्रीय खनिज नीति, 2008 में दिए गए अविधायन मामलों को गति देने के लिए तथा भारतीय खान ब्यूरो की एडवायजरी बोर्ड की दिनांक 7 अगस्त 2009 को आयोजित 15 वीं बैठक में दिए गए प्रस्तावों की अनुपालना में एक कार्यकारी ग्रुप का गठन किया गया है जो मशीनीकरण, कंप्यूटरीकरण, तकनीकी बदलावों को अपनाने के लिए खनन उद्यमियों को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों के संबंध में सुझाव देगा । इस कार्यकारी ग्रुप की रिपोर्ट खान मंत्रालय को भेज दी गई है ।
खनन पट्टा सूचना
खनिज (परमाणु और हाइड्रो कार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 के नियम 59(2) के अन्तर्गत
इस इकाई का कार्य खनन पट्टे से संबंधित सूचनाओं को तैयार करना तथा विभिन्न राज्य सरकारों से प्रपत्र ए’ बी तथा सी’ में प्राप्त समेकित वार्षिक विवरण्यिों के द्वारा प्राप्त सूचना तथा संघ प्रदेषों से खनिज (परमाणु और हाइड्रो कार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 के नियम 59 (2) के अन्तर्गत प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ’’डायरेक्ट्री आफ माइनिंग लीजेज’’ का प्रकाश न करना है। इस प्रकार प्राप्त आंकड़ों को भौतिक रूप से संधारण विश्लेषण तथा कम्प्युटीकरण द्वारा अद्यतन किया जाता है। अन्त में ’’डायरेक्ट्री आफ माइनिंग लीजेज’’ तथा अन्य वांछित आंकड़े सृजित किये जाते हैं। यह वार्षिक आधार पर सम्पन्न की जाने वाली एक सतत प्रक्रिया है। डायरेक्ट्री आफ माइनिंग लीजेज में सम्बंधित खनन पट्टों के संबंध में एक विस्तृत परिदृश्य स्पष्ट होता है जिससे पट्टा क्षेत्र की अवस्थिति, पट्टाधारक का नाम तथा पता, पट्टा क्षेत्र, पट्टा स्वीकृत करने की तारीख, पट्टा की निष्पादन की तारीख पट्टा की अवधि आदि से संबंधित सूचनाएं प्राप्त होती है। माइनिंग लीज (खनन पट्टा) सूचनाएं पूर्णतया कम्प्युटरीकृत हैं तथा हार्ड कापी के रूप में शुल्क पर उपलब्ध है।
खनन पट्टों एवं पूर्वेक्षण अनुज्ञापत्र की बुलेटिन
इस इकाई को खनन पट्टों एवं पूर्वेक्षण अनुज्ञापत्रों की बुलेटिन को तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है । इस बुलेटिन का मुख्य भाग अद्यतित खनन पट्टा निदेशिका से लिया गया है, जो खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 के नियम 59 (2), ) के वैधानिक उपबंधों पर आधारित राज्य सरकारों द्वारा प्रदत्त समेकित वार्षिक रिटर्न से लिया गया है । जहां तक पूर्वेक्षण अनुज्ञापत्रों / गहन सर्वेक्षण अनुमति पत्रों का प्रश्न है, खनिज (परमाणु और हाइड्रो कार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 के नियम 59(1) के अधीन प्राप्त एकल अनुज्ञापत्रों / अनुमति विलेखों का उपयोग कियाजाता है ।
इस बुलेटिन में शामिल सूचनाओं का राज्यवार, जिलावार, खनिजवार तथा सेक्टरवार विश्लेषण किया जाता है जिससे सूचना का समेकित ब्यौरों एवं खनन पट्टों /पूर्वेक्षण अनुज्ञापत्रों / गहन सर्वेक्षण अनुमति पत्रों के आंकड़ों का देशभर में समुचित उपयोग हो सके । यह एक अनवरत प्रक्रिया है तथा वार्षिक आधार पर जारी रहती है । यह प्रकाशन खनिज संसाधनों के न्यायोचित उपयोग हेतु योजना बनाने एवं तत्संबंधी नवीन कार्य प्रणाली को क्रियान्वित करने में उपयोगी है ।
केन्द्रीय पुस्तकालय
मुख्यालय स्थित भारतीय खान ब्यूरो के पुस्तकालय में पुस्तकों, पत्रिकाओं, जैसे आईबीएम व जीएसआई की प्रकाशित व अप्रकाशित रिपोर्टों, विभिन्न मंत्रालयों व खनन उद्योगों से जुड़ी इकाइयों व संस्थाओं की वार्षिक विवरणियों तथा अन्य संबंधति विषयों की रिपोर्ट आदि का अच्छा संकलन है । दिनांक 31/3/2010 को कुल संग्रह 1,40,000 था जबकि खरीद / आदान प्रदान पर आधारित पत्रिकाओं की संख्या 159 है जिसमें 16 विदेशी प्रकाशन है । उपयोग कर्ताओंके लाभ के लिए पुस्तकालय विषयवार ग्रंथसूचियों का संकलन कर उन्हें कंप्यूटरीकृत करता है । इसके अतिरिक्त यह पाठकों को फोटोकॉपी सेवा, संदर्भ पूछताछ और ऑनलाइन सेवाओं जैसे कि खानिज समाचार (एक पखवाड़े की सेवा), तकनिकी पत्रिका - विषय सूचि (एक मासिक सेवा), अतिरिक्त सूची (पुस्तकों के लिए - वार्षिक सेवा के लिए) प्रदान करके पाठकों की मदद करता है।
प्रकाशन अनुभाग
भारतीय खान ब्यूरो का प्रकाशन अनुभाग एक महत्वपूर्ण अनुभाग है जो तकनीकी प्रकाशन का कार्य करता है तथा ब्यूरो संबंधी सूचनाओं के बाहरी अकादमिक वैज्ञानिक व सरकारी संस्थानों में प्रसार के दायित्व का निर्वहन करता है । भारतीय खान ब्यूरो के मुख्यालय में अवस्थित यह इकाई एक समग्र इकाई है जिसमें संपादकीय, डीटीपी, उत्पादन, बिक्री व वितरण इकाइयों का समावेश है । भारतीय खान ब्यूरो के सभी तकनीकी प्रकाशन इस इकाई के संपादकीय जांच, फार्मेटिंग, कम्पोजिंग, प्रोडक्शन, आदि प्रक्रिया से गुजरते हैं । यह सभी प्रकाशन अनुभाग की एक ही छत के नीचे कार्यरत हैं । इस प्रक्रिया के बाद इन्हें वितरण हेतु भेजा जाता है । प्रत्येक वर्ष इस इकाई द्वारा लगभग 30 प्रकाशनों जिसमें भारतीय खान ब्यूरो का मुख्य प्रकाशन इंडियन मिनरल इयरबुक शामिल है का प्रकाशन किया जाता । प्रकाशन अनुभाग अपने नियमित दायित्व के निर्वहन में तथा यह ब्यूरो का प्रमुख व एकमात्र प्रसार चैनल होने के कारण सभी प्रकाशनों की वितरण व बिक्री व्यवस्था भी देखता है। यह इकाई असंख्य पतों का संकलन कर भारतीय खान ब्यूरो के अनेक खनन उद्यमियों के साथ पत्राचार भी करती है । भारतीय खान ब्यूरो प्रकाशनों की लगभग 3000 प्रतियों को प्रत्येक वर्ष 200 पतों(भारतीय व विदेशी) पर भेजा जाता है । प्रत्येक वर्ष प्रकाशनों की बिक्री से राजस्व की प्राप्ति होती है ।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें
मुख्य खनिज अर्थशास्त्री
तीसरा तल, ब्लाक डी इंदिरा भवन,
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