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भारतीय खान ब्यूरो में आपका स्वागत है
1948 में स्थापित भारतीय खान ब्यूरो खान विभाग, खान मंत्रालय के तहत एक बहुविषयक सरकारी संगठन है जो कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, आणिवक खनिजों और लघु खनिजों को छोड़कर खनिज संसाधनों के संरक्षण, वैज्ञानिक विकास तथा पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने में कार्यरत है ।
विशुद्ध रूप से एक परामर्शी निकाय के रूप में शुरूआत करते हुए भारतीय खान ब्यूरो एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन के रूप में उभरा है जो खनिज उद्योग के विभिन्न पहलुओं में गहराई तक शामिल है । भारतीय खान ब्यूरो के वर्तमान कार्यों में शामिल है खानों के निरीक्षण, भूवैज्ञानिकी अध्ययन, खनन योजनाओं और खनन स्कीमों की संवीक्षा और अनुमोदन के द्वारा खनिज संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देना, पर्यावरणीय अध्ययन और पर्यावरण संबंधी क्रिया कलापों का संचालन करना, निम्न श्रेणी अयस्कों के उन्नयन हेतु प्रौद्योगिकी विकासित करना तथा उनके उपयोग हेतु मार्ग तलाशना, खनन और सज्जीकरण परियोजनाएं हेतु सुसाध्यता रिपोर्ट तैयार करना, खनिज संसाधनों के खनिज मानचित्र और राष्ट्रीय खनिजसूची तैयार करना, खनिज उद्योग को तकनीकी परामर्शी सेवाएं प्रदानकरना, खानों एवं खनिजों के डाटा बैक के रूप में कार्य करना तथा तकनीकी और सांख्यिकीय प्रकाशन तैयार करना ।
उद्देश्य
आईबीएम सतर्कता, सतर्कता प्रशासन की गुणवत्ता स्थापित करेगा एवं इसमें सतत सुधार करेगा ताकि लोग समता, निष्ठा एवं बिना भेदभाव के संगठन हेतु उच्चतम नैतिक मापदंडों को रखते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से कार्य करने में सक्षम हो सके ।
संरचना / कार्य
आईबीएम सतर्कता के अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हैं। श्री गोविंद एल. निमजे, सहायक खनन अभियंता, श्री मुकेश कुमार शर्मा, सहायक खनन अभियंता और श्री दीपक कुमार, सहायक खनन अभियंता सतर्कता संबंधी कार्य में सहायता करते हैं ।
भारतीय खान ब्यूरो सतर्कता का कार्य विस्तृत रूप से निरोधक प्रकृति का है । भारतीय खान ब्यूरो सतर्कता का फोकस प्रोएक्टिव है जैसे यह लोगों को निष्ठा एवं बिना भेदभाव के भयरहित एवं पारदर्शी तरीके से संगठन हेतु उच्चतम नैतिक मापदंड रखते हुए कार्य करने में सक्षम बनाने हेतु वातावरण प्रदान करती है ।
शिकायत दर्ज करने की प्रणाली
बेबसाइट के माध्यम से सतर्कता विषयक शिकायतें प्राप्त करने हेतु प्रावधान बनाए गए हैं ।यह प्रणाली में पारदर्शिता एवं प्रक्रिया में गति लाने के लिए है । बेबसाइट के माध्यम से प्राप्त सभी शिकायतों को शिकायत कर्ता की सत्यता सुनिश्चित करने के पश्चात प्रोसेस किया जाता है, तथा दिए गए कार्यविधि के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाती है । सीवीसी के दिशा निर्देश के अनुसारयदि शिकायत सामान्य प्रकृति की है तथा उसमें सत्यापन योग्य कोई तथ्य नहीं है तो अज्ञात/छद्म नाम से प्राप्त शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है ।
सत्यनिष्ठा संधि (आईपी) को अपनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के संदर्भ में स्वतंत्र बाहरी मॉनिटर (आईईएम)
- श्री गंगाराम अलोरिया, आईएएस (सेवानिवृत्त)
- श्री विनय रंजन मिश्रा, आईआरएसएस (सेवानिवृत्त)
शिकायत दर्ज करने हेतु दिशा निर्देश
- शिकायत सुसंगत ब्यौरों सहित विशिष्ट होनी चाहिए जैसे निविदा से संबंधित शिकायत के मामले में निविदा/आपूर्ति आदेश/ कार्य आदेश संख्या एवं दिनांक इत्यादि होनी चाहिए ।
- खनन योजना/खनन स्कीम के अनुमोदन से संबंधित शिकायतों के मामले में खनन योजना/खनन स्कीम आईडी संख्या का जिक्र होना चाहिए ।
- शिकायत को प्रोसेस किए जाने हेतु सही नाम व पता अति आवश्यक है ।
- शिकायत दर्ज करने के पश्चात विषय पर कोई भी पत्राचार नहीं किया जाएगा ।
- यदि यह पाया जाता है कि शिकायत झूठी है और इससे कार्मिकों को परेशानी हुई है तो शिकायतकर्ता के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी ।
- सिर्फ सतर्कता दृष्टिकोण वाले शिकायत की जांच की जाएगी । सतर्कता दृष्टिकोण में शामिल है सरकारी पद का दुरूपयोग, अवैध ग्रेटिफिकेशन की मांग और स्वीकृति, गबन /धोखाधड़ी अथवा धोखा देने के मामले, घोर एवं जानबूझकर की गई लापरवाही, स्थापित प्रणालियों एवं कार्यविधियों का घोर उल्लंघन , विवेकाधिकार का लापरवाही से उपयोग, मामलों के प्रोसेसिंग में विलंब, इत्यादि ।
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